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तुम उस लड़की को जानते होजो हमारे घर के पास रहती थी,नहीं ना!तुम उस लड़की को जानते होजो मेरे साथ गुल्ली-डंडा खेलती थी,नहीं ना!तुम उस लड़की को जानते होजो घराट पर मुझे छेड़ती थी,नहीं ना!तुम उस लड़की को जानते होजो मुझे अच्छा मानती थी,नहीं ना!तुम उस लड़की को जानते होजो मेरे साथ शादी करना चाहती थी,नहीं ना!तुम उस लड़की को जानते होजो चढ़ाव-उतार में मेरे साथ थी,नहीं ना!इन सब बातों के बादतुम मुझे जानते हो,नहीं ना!यही न जानना,जानने के लिए हमें खींचता है।*महेश रौतेला

tum ush ladaki ko..

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🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳         भाईचारा        *********दिया दिवाली की बधाईदेखा क्रिसमस का त्योहारसिखों के बड़े निराले देखेधर्म आैर व्यबहारसबसे हसीन हमने देखाईद का आपसी प्यारयूँही हरा भरा रहेभारत का परिवाररहे मुबारक भाईचारारहे सलामत प्यारा वतन lआपस मे मिलकर रहें औरकायम रहे चैनोअमन llनोंकझोंक का मतलब नहीबंट गये आपस मे हमआपस की टकरार को देखबाहरी ना आंके हमको कमजब जब दुस्साहस पर का हुआहमने अखण्डता बचाई हैदुश्मन के दूर्विचार विरोध मेअपनी ताक़त दिखाई हैंएकदूजे के खातिर मन मे इज्ज़त एकदूजे को करते नमन lआपस मे मिलकर रहें औरकायम रहे चैनोअमन llसबका साथ सबका विकासअपना बहुल नारा हैसुख और दुख मे साथ-साथएकदूजे का सहारा हैकितनी कश्तियां तूफान ढूबोयापर सुरक्षित अभी भी किनारा हैंनज़र उठाके देखो ज़मी सेफ़लक तक बुलंद सितारा हैडटे रहेंगे साथ-साथ जबकौन करेगा अपना दमन lआपस मे मिलकर रहें औरकायम रहे चैनोअमन llइतना बड़ा लोकतांत्रिक अड्डाविविध विचार विविध भाषासमस्त विश्व के पटल पे ढूंढोंऐसी नही कहीं और परिभाषाऐसा क्या अद्भूत हैं यहाँजो समस्त विश्व के समझ से है परे समझ अकेला बढ़नेवाला दुश्मनपाता एक के पीछे एक खड़ेकरो विफल हर रणनीतिबचाके रखना अपना गठन lआपस मे मिलकर रहें औरकायम रहे चैनोअमन llदिया दिवाली की बधाईदेखा क्रिसमस का त्योहारसिखों के बड़े निराले देखेधर्म आैर व्यबहारसबसे हसीन हमने देखाईद का आपसी प्यारयूँही हरा भरा रहेभारत का परिवाररहे मुबारक भाईचारारहे सलामत प्यारा वतन lआपस मे मिलकर रहें औरकायम रहे चैनोअमन ll**************************

bhaichara

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धन-दौलत कहाँ चाहिए ज़िन्दगी मे शुुकून पाने के लिए,बस गज भर जमीन चाहिए दो वक्त की नींद लाने के लिए lकौन कहता है फकीरी मे ज़िन्दगी इक मौज नही,ये तस्वीर काफी हैं मौज-ए -एहसास ज़माने के लिए l                                  

faqiree

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dil bole okकरता हु काम वही, दिल कहे जो सही,झुकता यह सर नहीं,किसी के भी आगे कहींशर्तो पे अपनीही हरदम चलता हूँ,जान हथेली लिए घर से निकलता हूँकिसी से भी डरु नहीं, किसी से भी रुकू नहीं,ठानीहै जो दिल में, करता हूँ बस वहीऊपर निचे चर्चे हैं, दाएं बाएं चर्चे हैं,अपनी ही स्टाइल के हर जगह पर्चे हैंडंके की चोट पर हर बात बोलता हूँ,हर एक चेहरे के राज़ यहां  खोलता हूँक्यों की ,क्यों की ,क्यों की ,क्यों की ,क्यों कीदिल बोले ओके,दिल बोले ओके,कोई नहीं टोके,कोई नहीं टोकेदिल बोले ओके,दिल बोले ओके,कोई नहीं टोके,कोई नहीं टोकेज़िद पे अड़े तो,तो तो,तो, दुनिया की ठोके, दुनिया की ठोकेसुनो सुनो मेरे यारो , खुशियों को न तुम मारो,जितनी है गर बाज़ी, ऐसे तुम यु न हारोहोसलें बुलंद कर, आखियों को चार कर,ज़िन्दगी है शतरंज, दुश्मनो पर वार  करआना  जाना ज़िन्दगी का अपना एक फ़साना है,लाया क्या था ज़िंदगीमें, जो खो के फिर से पाना हैमेहनत से मिलती शौहरत,मेहनत से मिलता नाम,चढ़ते सूरज को यहां करते हैं सब सलामराज़  दिल के खोल दे तू, मन  की बात बोल दे,परवा है गर दुनिया की, बिंदास बोल देक्यों की ,क्यों की ,क्यों की ,क्यों की ,क्यों कीदिल बोले ओके,दिल बोले ओके,कोई नहीं टोके,कोई नहीं टोकेदिल बोले ओके,दिल बोले ओके,कोई नहीं टोके,कोई नहीं टोकेज़िद पे अड़े तो,तो तो,तो, दुनिया की ठोके, दुनिया की ठोकेबंदा हूँ में सीधा साधा , रखता हु नेक इरादा,होता है वह पूरा काम, करता हु जो में वादारिश्ते नाते होते हैं सब मतलब के,करो कुछ ऐसा यारो ,काम आओ सब केचाहत  अगर है तो मंज़िल मिल जाएगी,कसिमत भी अपनी यारा एक दिन खुल जाएगीसोते जागते यारों देखे तुमने जो सपने हैं,होजाएंगे पुरे सच एक दिन,वह भी सारे अपने हैंजो भी देखो ,जो भी सोचो ,करो तुम बस  वही,बोलता हु में वही , लगता है जो सहीक्यों की ,क्यों की ,क्यों की ,क्यों की ,क्यों कीदिल बोले ओके,दिल बोले ओके,कोई नहीं टोके,कोई नहीं टोकेदिल बोले ओके,दिल बोले ओके,कोई नहीं टोके,कोई नहीं टोकेज़िद पे अड़े तो,तो तो,तो, दुनिया की ठोके, दुनिया की ठोके

dil bole ok

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village life

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वह भूतवाले दिन थेजब भूत के पैर उल्टे होते थे,अंधेरे में आता थासुबह होते ही भाग जाता था।सबके अपने भूत होते थेरात में जुआ खेलने आता थाहमेशा हारता थालोगों को मालामाल कर जाता था,उसके पास बहुत धन होता था,कम होने से बैंक से निकाल लेता था।वह हमारी रातों का रोमांच था,बीड़ी जलाता,धान कूटता,उसे कभी नशे में नहीं देखा,रास्ते में आगे नहीं पीछे चलता था,भूतों के भी अपने अड्डे होते थे,श्मशान वाले भूत नाचते थे,कब्रिस्तान वाले गप्प मारते थे।*महेश

wah bhoot vale di..

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यह भी प्यार हैकाठगोदाम से नैनीताल जानासड़क के मोड़ों को देखनानदी के पानी में तैरनाझील के किनारे बातचीत करनाफिर अचानक पहाड़ों में खो जाना।नैनीताल से भवाली आनाढलान को पकड़नापेड़ों के बीच लुकाछिपी होनाफिर अचानक जंगलों में लुप्त हो जाना।यह भी प्यार हैभवाली से अल्मोड़ा तक चलनागरमपानी में चाय नाश्ता करनानदी के किनारों को तितर बितर देखनानन्दा के मंदिर में होनाअपने विद्यालय को निहारनाअपने बचपन को कुरेदनाफिर अचानक गलियों को भूल जाना।अल्मोड़ा से जागेश्वर जानासड़क का उतार -चढ़ाव नापनावृक्षों को टटोलनामंदिरों को गिननाधूप की तलाश करनाफिर अचानक सदियों में घुस जाना।*महेश रौतेला

kathgodam se nain..

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aaj unse mulakat hogi , jiske liye ye dil dhadkta haijinki payri baate sun ne ko kaan taraste haiwo muskurahat wo masumiyatna jane kya sukun milta haiunke ek deedar sekya yahi pyar hai.ya sirf ek ehsaas.....par jo b hai, bayan kar pana muskil haidil ka dhadkna , sanso ka bad janaek ajab si becheni....bas unhi ke baare me sochnaunke khyalo me khonaunki har zid ko pura karne k liye kuch b kar gujarnaunke chehre ki ek muskurahat ke  liye puri duniya se lad gujarnakya yahi pyar hai ...na jane ab wo kese honge..kya ye ahsaas unse milne k baad b yuhi kayam rahegapata nhi , par khush huaaj unse mulakat hogi...

aaj unse mulakat ..

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jabse dekha hai tumko, bas tujhme khoya rahta hupata nhi ishq hai tumse ya mere  dil ki khata hai.har pal tumhara chehra , nigahon me rahta haibayan nhi kar sakta kitna tum par ye dil marta haiteri ek baat sun ne ko mera dil dhadkta haitumse mohabbat ho gai hai , aesa mujhe  lagta haimumkin nhi tumhe pana , malum hai mujhefir b dil tumpe hi marta hai..aasan nhi hota ek taraf ishq, jise hota hai wo hi isse samjhta haiajeeb si  tadap, ajeeb si  becheni chhai rahti haibas teri yaadein me khoya rahta hai dil ,aur raat gujar jati haitujhe pana mumkin nhi fir b tere baare me sochta rahta huek teri muskurahat ke khatir puri duniya se ladta rahta hu..har pal tere sapne sanjoye rakhta hu,tumhe ho chahe kitni b nafrat humse, is dil me humesa tere liye pyar sanjoye rakhta hu

jabse dekha hai t..

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प्यार है उन्हें मुझसे,पर थोड़ा वो शर्माती हैथोड़ा घबराती है, थोड़ा इतराती हैफिर पलके उठा के मुझे देखकर ,अपनी नजरें झुकाती हैअपने मासूम से चेहरे पे,हल्की सी मुस्कान लाती हैफिर हमे सताने के लिऐ,किसी और से नजरें मिलाती हैफूलों सी नाजुक है,पर मुझ पर गुस्सा दिखाती हैप्यार है उन्हें मुझसेपर वो थोड़ा शर्माती है।

pyar hai unhe muj..

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कहूँ तो क्या कहूँ,ठंड की बातें जो कंपकपाती हैं,मंदिर की मुलाकातें जो आस्था जगाती हैं,उन मोड़ों की जो लुकाछिपी करते हैं,आकाश से गिरते तारे की जो खो जाता है,उठते-बैठते लोगों की जो उम्र गुजार रहे हैं,गरजते बादलों की जो डराते हैं,उन शामों का जिन का समय बताता आया हूँ,उन दिनों की जो गिनती में नहीं हैं,उन आँखों की जो मुझे देखती हैं,बहसों की जो सूखती जा रही हैं,बैठकों की जो अब नहीं होती हैं,झील के पानी की जो कम हो चुका है,नदी का जल जो रूका हुआ है,उस चढ़ायी की जो सड़क के नीचे दब चुकी है,उस जीवन की जो आस-पास हाथ-पैर मार रहा है,उस पक्षी की जो अभी-अभी उड़ा  है,प्यार की जो हमेशा उगता रहता है।शहर की जो घिसापिटा लगता है,गाँव की जो शान्त पड़ा है,बिमारियों की जो बिगड़ती जा रही हैं,राजनीति की जो पसीना पसीना हो चुकी है।*महेश रौतेला

kahuin to kya kah..

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कल लहर उठी थी अंतर्मन में, कल दुःख ही दुःख देखा आँगन में,कल प्रत्यक्ष था बीता जीवन, शोक से भरा तिमिर, गगन में,और सभी संताप पुराने, बनकर मेघ नयन में छाये,पर मैं न रुका, था अडिग मार्ग में, मैंने आँसू नहीं बहाये।कुछ अधिक मेरा मन भारी था कल, मौन चुभा जाता था प्रतिपल,जो चला गया, था सम्मुख पल को, फिर सबकुछ, होता था ओझल,और समय के बीते बंधन सारे, पाँव रोकने मेरे आये,पर मैं न रुका, था अडिग मार्ग में, मैंने आँसू नहीं बहाये।कल बुला रहे थे पहचाने स्वर, स्मृतियों में है जिनका घर,सबको जीवित, मरते देखा, हृदय काँप उठता था अंदर,और दूर दिशा से जाने किसने, विरह विलाप के गीत लगाये,पर मैं न रुका, था अडिग मार्ग में, मैंने आँसू नहीं बहाये।

maine aansu nahi ..

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आंखों में उतरे हुए,शब्दकोश से लाने पड़ते हैभावनाओं सेमिलते - जुलतेशब्द,दिल कोशब्द ढूंढने केलिए घूमना पड़ता हैदिमाग़ की सारी नशो मेंतब जाकर कहींआते है शब्द जुबां परदूसरे मस्तिष्क केशब्दकोश मेंअपनी जगह बनानेbharat singh

shabd

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