क्यों अकड़ता है इतना
हवा निकल जाने पर
लकड़ी की तरह
सीधा हो जायेगा
खुली तो तेरी आँखें होगी
पर देख तू नहीं पायेगा
हार पहना पहना कर
विदा करेंगे - तेरे हमदम
तेरे अज़ीज़ ही तुझको
पर मज़ा तू अपनी
आखिरी विदाई का
ले नहीं पायेगा
खुली तो तेरी आँखें होगी
पर देख तू नहीं पायेगा
चार कांधो पर उठाकर
चार कांधो पर उठाकर
तुझको मसानो तक
पहुँचाया जायेगा
कितना हजूम था जीते जी
पर कोई साथ तेरे
भी न जा पायेगा
खुली तो तेरी आँखें होगी
पर देख तू नहीं पायेगा
पर अब तू और तेरी मैं है कहाँ पर
इस सफ़र का आनंद भी
तू ले नहीं पायेगा
खुली तो तेरी आँखें होगी
पर देख तू नहीं पायेगा
डरता था उम्र भर
जिस आग से तू
उसी मैं भस्म होकर रह जायेगा
आग होगी तेरे चारो तरफ
पर हाय - तू चिल्ला भी नहीं पायेगा
खुली तो तेरी आँखें होगी
पर देख तू नहीं पायेगा
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