माँ रचियेता माँ है रचना
माँ है देवो के सर का ताज
माँ नहीं तो कुछ नहीं
इस जहाँ मैं आने के बाद
माँ रचियेता माँ है रचना
माँ है देवो के सर का ताज
मिलती नहीं है माँ जैसी सूरत
एक बार खो जाने के बाद
रिश्ते बदलते नाते बदलते
ना बदलती है सूरत उसकी
दिल मैं समां जाने के बाद
माँ रचियेता माँ है रचना
माँ है देवो के सर का ताज
जिसकी इबादत अल्लाह भी करता
जिसकी इबादत इश्वर भी करता
वो है हम सब की प्यारी माँ
माँ रचियेता माँ है रचना
माँ है देवो के सर का ताज
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