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"ऊपर वाले को तार"
खीझ तो जाते होगे ना तुम
जब दूध दही और बेल पत्रो से तुम्हें रगड़ते हैं
तुम्हारे ही बाग से फूल नोचकर
तुम पर ही नज़र करते हैं
कभी मंगला में सुबह चार बजे
कभी अज़ान में रोज़ाना पाँच दफे
तलवे घिसते आते हैं फ़रियादी मीलो से
गीली आँखो से गिरती इनकी मन्नते कबूलो
नहीं तो भक्तों की बेरूख़ी झेलो
तुम्हारे पल्लू से बाँध जाते हैं ये
अपने दर्द और अपनी फिकर कसकर
कुछ भी माँग लेते हैं,बड़े मँगते हैं
ना दो तो तुम्हारी शामत
और देने पर फिर हजम ना हो
तब भी तुम पर ही तोहमत
एक बार आ जाओ और सबको बता जाओ
"चिराग घिसने से नहीं निकला
खुदा हूँ मैं
तेरी आहें सुन कर आया हूँ
तुम्हारी ज़रूरतें तुम से बेहतर जानता हूँ
जिन्न नहीं की हर हुक्म बजाऊं
गुलाम नहीं हूँ तेरा
की तेरी हर मुराद का मुरीद हो जाऊं"
खैर.......
एक बार आ जाओ और गाइड्लाइन्स फिर से बता जाओ
बंसी छोड़ो और चक्र चला दो
आप बिज़ी हो तो नंद बाबा ही भिजवा दो
अगले पिछ्ले जन्म का छोड़ो
सब इसी जन्म में करवा दो
यहाँ के हालात बहुत संगीन हैं
आपके अस्तित्व पर भी प्रशन्चिन्ह है
थोड़ा लिखा ज़्यादा समझना
बाकी तो आप खुद भगवान हैं

"??? ???? ?? ???"

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"पगलू कहीं का"
ना इसका कोई अपना मकान है
ना कोई पक्का काम है
ठंडी में गजक का ठेला लगाता है
गर्मियों में टोल पे ककड़ी बेच आता है
बस एक सीली सी खोली है जिसका ये किराया भरता है
चूना भी है छत से बे-दीना ,फर्श पे ज़्यादा मरता है
दो बेल बनी हैं दरवाज़े पर और वेलकम लिखा रखा है
तेल की बोतल में गुलाब टिका गुलदस्ता सा दिखा रखा है
"पगलू '' कहीं का....
...भरे पेट और सीली छत को मज़हब मान बैठा है
दो वक़्त खाले तो दिवाली,
और एक बार तो रोज़ा कहता है
सपने तो गाँव से शहर के रस्ते में कहीं गिर गए थे
जिस दिन गाँव की मिटटी छोड़ी उसी दिन दिन फिर गए थे
जब जवानी लड़खड़ाते गुज़रती है तो अक्सर बुढ़ापा धूल चाटता है
वो सोते हुए सपनो में अब भी अपने पुराने बैल हांकता है
कभी भट्टों में खुदके संग ईंटे सेकी
कभी चौकीदारी का काम किया
इन सबकी कलदारी मिलाके
जैसे भी कन्यादान किया
फिर आज सुबह ही चौखट पर संदूक रखने की आवाज़ आई थी
हांकते बैलों को छोड़ खेत में ,शामत फिर से होश में लायी थी
अपने डर को चूने के साथ झाड़ कर, वो दरवाज़ा खोल के मुस्कुराया
वो सुबकती हुई आ लगी यूँ गले कि तमाम मामला समझ आया
चलो एक और कोड़ा सही
मगर इसके आने से घर तो कुछ ज़िंदा हुआ है
सीलन दीवारों पर से उड़ने लगी है
बस "पगलू" का दिल सीला हुआ है

"???? ???? ??"

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