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आज की शाम कुछ यूं हुई,
छत पे बैठे थे हम
बादल गरजने लगे, बजली चमकने लगी
और तकते ही तकते  बूंदे माथे पे आ पड़ी
आज की शाम कुछ यूं हुई।
मन में यादे चल रही थी दिलदार की
चेहरा खयालो में बसा हुआ था
और तकते ही तकते बादलों ने उसका रूप ले लिया
आज की शाम कुछ यूं हुई।।
यादों में उनकी, आंखे भरने लगी थी हमारी
दीदार को उनके जी मचलने लगा था
और तकते ही तकते उनका फ़ोन आ गया
आज की शाम कुछ यू हुई।।।
बातें शूरु हुई,
कुछ हमने कहा, कुछ उन्होंने कहा
प्यार उनके भी मन में था
प्यार हमारे भी मनमे था
और तकते ही तकते दोनो ने इज़हार कर दिया
आज की शाम कुछ यूं हुई।।।।
आंसू जो पहले याद के थे उनकी,
बदल गए वो प्यार में
बातें शुरू ही हुईं थीं कि
ज़ोर से गाल पे दर्द हुआ
और माँ उठा रहीं थी सुबह
की उठ जा स्कूल जाना है
और आज की शाम तो अभी हुई ही नाही थी।।।।।
                                             -जितेंद्र कौशिक

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Dev Kumar

kuch to asar dikha aye mohobbat tu usko bhi......! kahi lage na tu bhi jhooti usko meri hi

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