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में चला, में चला,अपनी धून में चला
ज़िन्दगी ढूंढने अपनी राहें चला..ला ला ला ला ला ला

चला चला, चला बेफिक्र,किधर है मंज़िल, नहीं है खबर (2)

गर मिल भी जाये जो मुझको मोहब्बत तो उसको  में यूँ थाम लू
कह दू ज़माने से, दिल के पैमाने से आ बस तेरा नाम लू,
बढ़ती ही जाती  है यह बेकरारी, न आता है दिल को सुकून
तेरा नशा है यह चारो  दिशाओं में, छाया यह तेरा ज़नून

हाले दिल क्या कहूँ,बिन तेरे न रहूँ
चाहत में दूरियां , इक पल भी न साहू.

सुनो सुनो, तुम दिल की सुनो,करो वही जो दिल यह कहे(२)

बंधन सारे तोड़ के, लम्हो को जोड़ के
में चला , में चला, खुशियां ढूंढ़ने.ला ला ला ला ला ला

सोचा नहीं था, कभी ऐस होगा, चमकेगी यह किस्मत मेरी.
देखा था ख्वाबों में, चाहा था बाँहों  में, वह हो जाएगी बस मेरी
दिल का यह आलम न पूछो मेरा बस,खोया है यह इस कदर
जगता हु रातों को, सोता नहीं हू,में, खुद की नहीं है खबर


मेरा  दिल खो गया,बस में अब न रहा,मांगी थी जो दुआ,हमसफ़र मिल गया


मिला मिला जो मौका तुम्हे,इसे कभी न तुम जाने दो(२)

ख्वाबों को सजाके में, नींदो को बुलाके में
में चला ,में चला, सपने करने अपने ला ला ला ला ला ला.

 

 

 

mein chala

Lyrics 0

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
सृजन की यह आभा है
हिन्दी केवल एक गाना नहीं
जीवन की जयगाथा है।

हिन्दी केवल एक वर्ग नहीं
विविधताओं का भंडार है
हिन्दी केवल एक तर्क नहीं
समीक्षाओं का संसार है।

हिन्दी बहुत सरल है
प्रकृति जिसकी तरल है
संवेदनाओं की भूमि में
यह परिपक्व फसल है।

हिन्दी केवल मातृभाषा नहीं
संवैधानिक एक पर्व है
हिन्दी केवल राजभाषा नहीं
गणतांत्रिक यह गर्व है।

हिन्दी केवल एक बोली नहीं
चिंतन की यह उपमा है
हिन्दी केवल एक मोती नहीं
मंथन की यह महिमा है।

अभिव्यक्ति का अंश है
यह न कोई अपभ्रंश है
आदिकाल से भी आदि
सभ्यताओं का वंश है।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की यह ज्वाला है
हिन्दी केवल परिभाषा नहीं
सृजन का यह प्याला है।

हिन्दी केवल एक संकाय नहीं
ज्ञान की यह दृष्टि है
हिन्दी केवल एक पर्याय नहीं
सम्मान की यह सृष्टि है।

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं
के साहित्यिक पतन रोकती यही
पठन-पाठन अतिसुंदर लेखन
लोक-लुभावनी लोकोक्ति यही।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की जिज्ञासा है
हिन्दी केवल एक आशा नहीं
मन की महत्वाकांक्षा है।

हिन्दी केवल एक मंत्र नहीं
आध्यात्मिक अनुनाद है
हिन्दी केवल एक छंद नहीं
यह आत्मिक अनुवाद है।

अनुदार नहीं बहुत उदार है यह
उद्वेलित मन का उपहार है यह
वैचारिक व्याकरण से सुसज्जित
हृदय का उद्दीप्त उद्गार है यह।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की जिजीविषा है
हिन्दी केवल अभिलाषा नहीं
सृजन की सही दिशा है।

हिन्दी केवल एक मुक्तक नहीं
मर्म की मधुशाला है
हिन्दी केवल एक पुस्तक नहीं
कर्म की पाठशाला है।

राष्ट्रीय गौरव है यह
शासकीय सौरव है यह
क्लिष्ट और कर्कश नहीं
मधुर कलरव है यह।

हिन्दी केवल एक पथ नहीं
चिंतन की उपमा है
हिन्दी केवल एक रथ नहीं
मंथन की महिमा है।

हिन्दी केवल चलचित्र नहीं
अभिव्यक्ति का संगीत है
हिन्दी केवल एक क्षेत्र नहीं
अनुभूति का यह गीत है।

हिन्दी केवल एक प्रदेश नहीं
बल्कि संपूर्ण भारत है
हिन्दी केवल राजआदेश नहीं
बौद्धिक अभिभावक है।

हिन्दी केवल शब्दकोश नहीं
विधाओं का विस्तार है
हिन्दी केवल ज्ञानकोश नहीं
मेधाओं का मल्हार है।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
कवि की कविता है
हिन्दी केवल एक आशा नहीं
रवि की सविता है।

हिन्दी केवल एक अक्षर नहीं
यह विशिष्ट योग्य वर्ण है
हिन्दी केवल हस्ताक्षर नहीं
अपितु हृदय का दर्पण है।

हिन्दी केवल मातृभाषा नहीं
सृजन की यह आभा है
हिन्दी केवल राष्ट्रभाषा नहीं
जीवन की महागाथा है।।

-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान

Hindi kewal ek b..

Poems 0

तसव्वुर में मेरे आजकल तुम्हारी तस्वीर चलती है
काग़ज़ पर अल्फ़ाज़ नहीं बल्कि तस्वीर उभरती है।

तेरी तस्वीर जब भी देखता हूँ, ख़यालों में खो जाता हूँ
मैं कुछ नहीं लिखता हूँ, तेरी तस्वीर मुझसे लिखवाती है।

तेरी रूह, तेरा नक़्श, तेरा नाम, सब चाँदी जैसे सफ़ेद हैं
दिल के अंधेरे कमरे में, तू रौशन कोई खिड़की लगती है।

तेरी खुशबू का अंदाज़ा तो इस बात से मालूम चलता है
कि जिस गली से गुज़रे तू, वो गली फूलों सी महकती है।

तेरे आने से मेरी ज़िंदगी का अधूरापन अब खत्म हुआ
ज़िंदगी पहले के बजाय इन दिनों ज्यादा मुस्कुराती है।

मुझे ये ख़बर है कि तुम्हें मेरे फ़ितूर की कोई ख़बर नहीं
सुन ओ बेख़बर, तेरी तस्वीर तो मेरी आँखों में बसती है।

दुआओं की दरख़्वास्त है, ये जुदाई नाकाबिले बर्दाश्त है
सुना है कि दुआओं से तक़्दीर की तस्वीर बदल जाती है।।

Tasawwur mein mere

Poems Sher-o-shayari 0

ना तुम्हें याद कर सकता हूँ, ना तुम्हें भूल सकता हूँ
शर्त यही है मोहब्बत के इम्तिहान की।

जिस पल में साँस लेता हूँ, उस पल में याद आती हो
जिस पल में याद आती है, उस पल के साथ आती हो।

चाहत के समंदर में जब भी गोता लगाया
मन का हर एक मोती चमकता हुआ पाया
लेकिन जब मन के अंदर गोता लगाया
तो मन के समंदर को सूखा ही पाया
मीलों गहराई तक, काई तक नहीं जमी थी वहाँ
पानी तो बहुत था मगर, था सब आँखों में जमा।

वही पानी, जिसे बेवज़ह बहने की इज़ाज़त नहीं
हाँ गर जज़्बात अश्क़ों की शक़्ल अख़्तियार कर सके
तो इज़ाज़त है बहने की।

इज़ाज़त मिलते ही आँसुओं का सैलाब उमड़ने लगता है
आँखों से अश्क़ों की रिहाई का
यह मंज़र बड़ा ही गीला है।

ना तुम्हें महसूस कर सकता हूँ, ना तुम्हें छू सकता हूँ
शर्त यही है इश्क़ के इम्तिहान की।।

Shart yahi hai

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