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ध्यान...
स्वामी प्रेम अरुण रोज़ सुबह महावीर गार्डन आते हैं|उनके अनुसार यहाँ सुबह सुबह प्रकृति के नज़दीक ध्यान करना उन्हें स्वयं के और नज़दीक ले जाता है|आज वे अपने साथ निशांत को भी लाये हैं,ध्यान के बारे में सुनकर उसकी रूचि उत्पान्न हो गयी तो चला आया साथ में|”ध्यान एक बहुत गहरा अनुभव है बेटा,ध्यान की अवस्था में हम किसी और ही तल पे होते हैं,बाहरी दुनिया से वास्ता खत्म,किसी का कोई प्रभाव नहीं,स्वयं के करीब..”कहते हुए स्वामी जी बढ़े जा रहे थे अपने पीपल के पेड़ की ओर|यही स्वामी जी की ध्यानस्थली थी,रोज़ यहीं ध्यान करते थे उनके अनुसार यहाँ कुछ विशेष ऊर्जा विकसित हो गयी थी|”तो ये गहरा अनुभव होता कैसा है,आपको तो हुआ ही होगा,इतने समय से आप ध्यान कर रहे हैं”,निशांत पूंछ बैठा|”अनुभव बतलाया थोड़े ही जा सकता है, वो तो महसूस करने की चीज़ है”|हालाँकि निशांत इस उत्तर से संतुष्ट तो नहीं था पर मान गया,आखिर इसे नापने का कोई पैमाना भी तो न था|स्वामी जी अपने पीपल के पेड़ के नीचे पहुच चुके थे, निशांत के मन में प्रश्न घूम रहे थे,आखिर इस गहरे अनुभव की पुष्टी कैसे हो ,क्या इस तरह कोई भी स्वयं को गहन ध्यानी नहीं कह सकता आदि आदि प्रश्न उसके मन में हलचल मचा रहे थे|स्वामी जी पीठ सीधे कर,हाथों को घुटनों पे रखते हुए ध्यान की मुद्रा में बैठ गए|”अब मैं ध्यान में दुनिया में जाने वाला हूँ,बाहरी दुनिया का जहाँ कोई प्रभाव नहीं है, परम सुख और शांति की ओर”कहते हुए स्वामी जी ने आँखें मूँद लीं|निशांत उन्हें देख रहा था,उनके हाव भाव से से लग तो रहा था की वे एकदम शांतचित्त हो चुके हैं,उनकी लम्बी लम्बी साँसों पे गौर करते हुए निशांत सोच रहा था की शायद वास्तव में ही स्वामी जी किसी गहरे अनुभव से गुज़र रहे हैं,उनके चेहरे के भाव भी इस बात की पुष्टी सी कर रहे थे|निशांत अपने विचारों में गुम ही था की तभी पास खेल रहे बच्चों की गेंद स्वमी जी सिर पर आकर लगी,स्वामी जी हडबडा के उठे,चेहरे का शांत भाव उड़ने में पल भर भी न लगा,उसकी जगह अब क्रोध ने ले ली थी|”अरे इतने बड़े पार्क में एक ये ही जगह है क्या खेलने के लिए..!!”,स्वामी जी क्रोध से चिल्लाये,उनकी धीमी लम्बी सांसें अब तेज़ हो चुकी थीं,आँखें क्रोध से लाल,विचलित|बच्चे तो तब तक अपने अपने ठिकाने ढूंड कर उनमे छुप ही चुके थे|”बड़े बदतमीज़ बच्चे हैं,दिख नहीं रहा क्या,यहाँ मैं ध्यान कर रहा हूँ,पता नहीं इनके माँ बाप कैसे इन्हें यहाँ सुबह सुबह खेलने भेज देते हैं”,कहते हुए स्वामी जी वहीँ पेड़ के नीचे बैठ गए और बच्चों की गेंद कभी वापस न देने के इरादे के साथ पास में रखली| निशांत ये सब देख कर मन ही मन मुस्कुरा रहा था,शायद स्वामी जी के ध्यान,गहरे अनुभव,परम शान्ति इत्यादि का उदाहरण देख कर| या शायद उसे कुछ पैमाना मिल गया था तथाकथित “गहराई ” नापने का|


-सम्यक मिश्र
  जबलपुर

DHYAAN

Short Stories 0

आज देखा तुम्हें तुम थे खोये हुए
जाने किस हाल में तुम थे हँसते हुए
तुम थे रोते  हुए
आज देखा तुम्हे…………………………………..

बात कोई भी हो साथ मेरा रहे
रब से जब हो दुआ दिल तो बस ये कहे
चाहे खुशियों को मुझसे बचा लोगे तुम
पर न ग़म को मुझसे छिपा पाओगे
ज़िन्दगी में अँधेरा हो कितना घना .........
रोशनी की किरण मुझसे तुम पाओगे।
आज देखा तुम्हे……………………………………………..

दिल की गहराई से प्यार तुमसे किया
पर न तुमने ये दिल को समझने दिया
जाने क्या हैं तुम्हारी ये मजबूरियाँ
जिस वजह से हैं की तुमने ये दूरियाँ
यूँ ही मेरी मोहब्बत रहेगी जवाँ .........
चाहे तुम इस जहाँ में रहो भी जहाँ
आज देखा तुम्हे……………………………………
                                    
-मोहित खरे

AAJ DEKHA TUMHE ..

Lyrics 0

मुट्ठी भर भर धूप बटोरी
रात से भर ली चांद कटोरी।
नींदें रख लीं जेब मे भरकर
सपनों से जो जागे डर कर
समय के कागज तोडे मोडे।
दिल ने कितने रिश्ते जोडे ...!
टूटन आंसू से चिपकायी
मिले नही की हुई विदायी।
कतरा कतरा जीवन जीते,
चुप रहतेऔर पीडा पीते,
ह्रदय फफोले खुद ही फोडे।
दिल ने कितने रिश्ते जोडे...!
पलकों से कुछ रेत उठाकर
इंद्रधनुष के रंग चुराकर ।
रिश्तों की बुनियाद बनाने,
खडे किये जो नर्म ठिकाने,
कालचक्र ने हंसकर तोडे।
दिल ने कितने रिश्ते जोडे...!
पर जबसे सच को जाना है
दुनिया को अपना माना है
हर दिल मे हम ही रहते है
श्वांस श्वांस मे हम बहते हैं
रिश्ता अब हम किससे तोडे
दिल ने सबसे रिश्ते जोडे....!
मधुर मोहन मिश्र

ristey

Poems 0

                                                                
लीबीदो इसका मतलब  sexual desire होता है  पर ये जानना  मुश्किल  है की ये  sexual desire  किस हद तक लोगो में होती है कहा जाय तो हर लोगो के अंदर  अलग अलग तरीके की  sexual desire  होती है किसी के लिए सेक्स मनोरंजन है तो किसी के लिए मजबूरी , किसी के लिए  पैसा तो किसी के लिए  frustrations
पर मेरी कहानी में सेक्सडिजायर इन्तिज़ार से जुडी हुई है  एक औरत का 15 साल का इंतज़ार …….
शहर से दूर एक आलीशान बँगला है,  जिसकी खिड़िकिया हमेशा बंद रहती है  ये बँगला खुद में अकेला है  और इस बंगले में रहती है  एक अकेली  औरत  जिसकी उम्र ३८ साल है उसका नाम कामनी है वो एक अच्छे रहीस परिवार से थी  १५ साल पहले उसकी शादी एक बिज़नेस मैंन से हुई थी पर शादी के एक साल बाद ही उसके पति ने sucide  कर लिया  उसके पति ने sucide  क्यों  किया ये तो आज तक किसी को पता नहीं  चला.
बहुत  ही काम लोग है जो कामनी को जानते है .उनके मुताबिक कामनी बहुत शर्मीली  किस्म की औरत है , लोगो से बहुत काम बात करती है कामिनी के यहाँ एक नौकर काम करता था उसके मुताबिक  कामिनी के बंगले के अंदर एक अलग सी दुनिया है घर के अंदर अजीब अजीब सी मुर्तिया  और  पैन्टिन्ग है हमेशा अँधेरा रहता है, उसने एक लड़के का पुतला बनाया हुआ है  जिससे वो रोज़ बात करती है उस पुतले को वो रोज़ सजाती  है और अजीब अजीब सी बातें करती है
उसके नौकर की माने  तो पति के गुजर जाने के बाद कामनी की दिमागी हालत कुछ ठीक नहीं है . पर  कौन था वो जवान लड़के का पुतला जिससे कामनी बात किया करती थी ??  इसके पीछे एक कहानी है

कामनी को  इंतज़ार था एक लड़के का,, कामनी ने उसे पहली बार गार्डन में देखा था ! जब वो महज 4 साल का था कामनी उसे रोज़ गार्डन में देखने आया करती थी वो रोज़ झूले में बैठ जाती और देर तक उस बच्चे को घूरा करती थी, पर उसके बच्चे को देखना का नज़रिया बड़ा अजीब था एक अलग सी चाह थी उसे   उस बच्चे के लिए !
पति के मर जाने के बाद  कामिनी खुद को ज्यादा  आज़ाद महसूस कर रही थी ..और वो अंतिम दिन था जिस दिन कामनी उस बच्चे को देखने के लिए उस गार्डन में आये थी क्यूकि उसने उस  बच्चे को बेहोश कर के चुरा लिया था !
कामनी उस बच्चे को लेकर दूसरे शहर  चली गई वहा उसने उस बच्चे को बोर्डिंग स्कूल के एक वार्डन को सौप दिया कामनी ने उस वार्डन को पैसे देते हुए कहा
" मुझे उम्मीद है ये पैसे आपके लिए काफी  होंगे  समय समय में  आपको और पैसे मिल जायेंगे बशर्ते  इस लड़के के दिमाग और दिल में मेरा नाम होना चाहिए ! इसके  दिमाग में एक ही बात होनी चाहिए  की मुझे कामिनी का एहसान चुकाना है और जब ये जवान हो जाये तो इसी मेरे पास भेज देना ''

और आज लम्बे समय के बाद कामिनी का इंतज़ार खत्म होने जा रहा है वो लड़का आज  १५ साल बाद लौट रहा है  कामिनी अपने आप को शीशे में देख कर शर्मा  रही है वो सुबह से मेक उप कर रही है उसने उस पुतले की तरफ देखा जिससे  १५ साल से बाते किया करती थी
कामिनी -  ना जाने कितने सालो से तुम मुझे सुन रहे हो पर आज तुम मुझसे बात करोगे, आज तुम लौट रहे हो बहुत  इंतज़ार करवाया तुमने
अचानक दरवाजे की घंटी बजती है कामिनी दौड़  कर दरवाजा खोलती है और सामने से आवाज आती है
   "आप ही कामिनी  रायजादा हो ना ?? मैं सोनू जिस  अनाथ लड़के को आपने  दया की और मुझे पढ़ाया  मेरी हर जरुरत को पूरा किया !"
कामिनी उसे एक टक देखे जा रही थी
सोनू - जी मैं  सही पते में तो  आया हु  ना ??
कामिनी - (धीरी  आवाज से) बिलकुल सही पते में आये हो
कामिनी उसके गाल में हाथ रखते हुए कहती है
"बिलकुल सही चुना था मैंने तुम्हे बिलकुल काम देव लग रहे हो"
सोनू कामिनी से मिलने के बाद घबरा रहा था   पर वो करे तो क्या करे जाय  तो कहा जाय  बचपन से उसे एक ही बात सिखाई गई थी " कामिनी सिर्फ कामिनी "
बंगले के अंदर घुसते ही सोनू की नज़र दीवारो और बंद खिड़कियों में गई
सोनू- इस घर की खिड़किया क्यों  बंद है ?? आप को यहाँ घुटन नहीं  होती??
कामिनी- घुटन क्यों ?  जीने के लिए चंद  हवा चाहिए जो इस घर में है !
कामिनी सोनू के करीब जाती है उसके  ओंठो के नज़दीक ,
यदि तुम्हे घुटन हो रही है तो मेरे साँसों से सांस  ले लेना
सोनू घबरा कर थोड़ा पीछे हटता  है
कामनी - ( हॅसते हुए ) जानते हो तुम ये खिड़किया  दरवाजे  क्यों बंद है??  क्यूंकि मैं  वक़्त से  डरतीं  हु  आने वाले हर पल से डरती हु.. खिड़किया  खोलूंगी तो, दिन रात होने का पता चलेगा . मैं अपने घर में कैलेंडर नहीं  रखती क्यूंकि कैलेंडर से  मुझे महीने पता चलता है, मैं कभी अपना bitrhday   celebrat  नहीं  करती   क्यूंकि मुझे  इससे साल का पता चलता है मैं हर वो चीज़ से नफरत करती हु जो मुझे वक़्त बताते है पर  आज तुम आये तो मुझे वक़्त का पता चल ही गया की १५ साल बीत चुके है
पर इस घर के अंदर तुम  समय का पता नहीं  कर सकते  मुझे ये वक़्त बूढी औरत नहीं बना सकता ..... और  प्ल्ज़ तुम भी अपनी घडी उतार  दो ...
वो जोर जोर से हसने लगती है   उस घर में उसकी हसी  गूंजने लगती है.


कामिनी - बहुत दूर से आये हो चलो मैं तुम्हे नहला देती हु
सोनू -जी मैं  खुद  नहा लूंगा आप मत परेशान होइए
कामिनी सोनू के करीब जाती है
कामिनी -यदि मैं  कहु मुझे तुम्हारे साथ नहाना है तो ?
सोनू - (घबराते हुए )  जी.... जी नहीं
कामिनी - घबरा रहे हो  वो क्या है ना मेरे घर में पानी काम आता है  तो हम साथ नहा ले  तो ज़यादा बेहतर होगा
कामिनी  उसे बाथरूम में ले जाती है उसके शर्ट उत्तर के साबुन लगाने लगती  है 
कामिनी -  कभी तुम्हे कोई लड़की पसंद आई  है ?
सोनू - अभी तक किसी लड़की को गौर नै किया
कामिनी - ( हँसते हुए ) अच्छा तुम मुझे देखो और मुझे गौर करो  कैसी  लगती हु मै हां ???
सोनू शर्म से अपना सर झुका लेता  है
कामिनी - (थोड़े गुस्से में) सोनू ... सोनू  अपना सर ऊपर करो और मुझे देखो 
इसके बावजूद सोनू अपना सर झुकाए रहता है  कामिनी अपने हाथो से सोनू का  सर ऊपर करती है
कामिनी - ( गुस्से में ) मेरी तरफ देखो इस घर में शर्माने का हक़ सिर्फ मेरा है
                         

सोनू को पता चल गया था की कामिनी उससे क्या चाहती  है  इधर  कामिनी सोनू को अपने और आकर्षित करने के लिए रोज़ नए नए  मेक उप करती  वो मेक उप   में बड़ी अजीब लगती थी  सोनू को उससे डर लगने लगा था  वो चाह के भी कुछ नहीं  कर सकता था क्योकि  उस बंगले की चाभी  कामिनी के पास हुआ करती थी .
वो मेक उप रूम में सोनू का मेक उप कर रही है 
कामिनी - सोनू... सोनू  तुम इतना चुप क्यों  रहते हो ?
सोनू -  जी ..जी ऐसा नहीं है
कामिनी - अच्छा तुम बोर हो रहे हो , हम्म  अच्छा हम एक गेम खेलंगे आज , दूल्हा दुलहन वाला खेल आज मैं  दुलहन बनूँगी  तुम दूल्हे राजा आज मैं  तुम्हे दूल्हे की तरह सजाऊँगी, और खुद दुलहन  जैसे ,  तुम मेरे कमरे में आओगे  मैं  तुमसे शर्माऊंगी  पर तुम एक मर्द की तरह मुझे अपने बाहो में  झकड लेना  मैं  नखरे करुँगी  " आज नहीं आज छोड़  दीजिये प्ल्ज़्ज़ .... तुम मुझे अपनी और जबरदस्ती  खीच लेना   बहुत मज़ा आएगा
  तुम सुन रहे हो ना मैं क्या कह रही हु
सोनू -( घबराते हुए )   हां... जी ..जी
कामिनी - मेरे बैडरूम में आ जाना  तुम्हारी दुल्हन इंतज़ार कर रही है
और रात भर कामिनी सोनू के जिस्म से खेला करती पुरे घर में सिर्फ कामिनी की आह सुनाई देती और सोनू की चीख                  
           
ना दिन का पता चलता ना रात का चारो तरफ अँधेरा रहता , सिर्फ कामिनी की आवाज गूंजती रहती  पुरे बंगले में लाइट  सिर्फ एक कमरे में जला करती था वो था कामिनी का का मेक उप रूम , उसे अपने मेक उप रूम से बहुत लगाव था  कामिनी को पुरानी कामुक  मुर्तिया बहुत पसंद थी और   खुजराहो की मूर्तियों की तरह  कई मूर्ति उसके घर में थी और आज वो  अपने आप को उन्ही  मूर्तियों की  तरह सजा रही है 

कामिनी - बताओ सोनू आज मै  कैसी  लग रही हु ???
सोनू _ जी ... जी काफी जवान दिख रही है
कामिनी- ( तेज़ आवाज में )  जवान तो मै  हू ...इसमें कोई शक नहीं.. मैंने पूछा मैं  कैसी लग रही हु ???
सोनू - ( घबराते हुए ) जी बहुत ही सुन्दर  .....
कामिनी -  वैसे तुम मुझे इंद्रा लोक की अप्सरा भी कह सकते थे  ....... चलो कोई नहीं ...
और फिर कामिनी सोनू के सामने अश्लील  सा  डांस  करने लगी वो डांस बड़ा ही भयावह  था वो सोनू को डांस करते करते  किश1 करती  सोनू के कपडे फाड़  देती
कामिनी - आओ सोनू  मेरे साथ डांस करो  आओ ना  आ जाओ मेरे रंग में रंग जाओ
सोनू- जी मेरे से डांस नहीं बनता 
कामिनी - (हैरानी से ) क्या ???? 
सोनू  -जी मेरे से डांस करते नहीं  बनता
कामिनी ने सोनू के गाल में एक जोर से थपड जड़  दिया

कामिनी - मैंने कहा की डांस करो मतलब डांस करो मैंने ये तो नहीं पूछा की तुमसे डांस करते बनता है की नहीं या फिर तुमने पहले डांस  किया है की नहीं
सोनू -  जी ..... जी जी
कामिनी - ( झूमते  हुए )  धीरे धीरे अपने कपडे उतारो   सोनू ....
फिर कामिनी  झूमने लगी  और पागलो जैसे हसने लगी  वो अश्लील से ज़यादा डरा देने वाला डांस था   बड़ा ही डरा देने वाला   नज़ारा  था सोनू अपने डरी  हुई नज़र से उसको देख रहा था  
रोज़ नये नए   जिस्म के खेल में  सोनू कमजोर होता जा रहा था . कामिनी की इच्छा  का अंत तो दिख ही नहीं  रहा  था  हर समय उसे सोनू को तैयार करती .. कभी उसके पास दुल्हन बनकर  उसके पास जाती तो कभी  कॉलेज गर्ल की तरह  बनकर उसके पास आती  सोनू हर उस पल से डरता  जब  वो उसके करीब आती  उसकी आहट सोनू की दिल की धड़कन बढ़ा देती...  पर आज सोनू लाचार है ...... आज सोनू ने अपने आप को दरवजे में बंद कर लिया है
कामिनी- मेरे काम देव देखो आज तुम्हारी कामिनी ने क्या पहना हुआ है? ( कामिनी ने दरवाजा खटखटाया  )
सोनू  माफ़ करिये  आज मेरा कुछ करने का मन नहीं है
कामिनी _ मेरे प्रियतम क्या हुआ
सोनू - जी अब मेरे से ये सब कुछ नहीं  होता  मुझे आप से डर लगता है प्ल्ज़्ज़ मुझे छोड़  दीजिये मैं  आपका एक एक क़र्ज़ लौटा दूंगा  पर  प्ल्ज़्ज़  मुझे इस घर से आज़ाद कर दीजिये  ( सोनू रोते हुए )
कामिनी - सोनू दरवाज़ा खोलो   .... मुझे तुम्हारी बच्चो जैस हरकत एक भी पसंद नही  है
सोनू -मैं नहीं खोलूंगा दरवाजा
कामिनी -( चिल्लाते हुए ) सोनू ...सोनू  इस घर में तुम्हे सिर्फ एक चीज़ ही बचा सकती है वो है तुम्हारी मर्दानगी  अच्छे मर्दो की तरह दरवाज़ा खोल दो
सोनू -  ( रोते हुए ) इससे  अच्छा  है की मैं नामर्द  बन जाऊ  नहीं  जीना ऐसी गन्दी ज़िंदगी
कामिनी - अरे ना !!!!! तुम नामर्द बन गए तो मेरा क्या होगा  अब तुम दरवाज़ा खोलते हो की मैं दरवाज़ा तोडू

सोनू  चुप हो जाता है  कामिनी  हथोड़े  से दरवाज पीटना  शुरू कर देती है थोड़े ही देर में दरवाजा खुल जाता है  वो सोनू के बाल पकड़ के  घसीटते  हुए अपने मेक उप  रूम में ले जाती है

कामिनी - (गुस्से में सोनू को मरते हुए  )  नामर्द बनेगा  तू आज,  हम्म   मैं  जो मुर्ख हु जो तेरे  इंतज़ार  १५ साल से कर रही हु...  चल तुझे मैं बताती हु मर्दानगी क्या होती है
कामिनी सोनू को औरत जैसा सजाने लगती है  उसके ओंठो में लिपिस्टिक  और हाथो में चूड़ी  पहना  रही है  उसे साड़ी भी पहना दिया है सोनू अपनी सूरत को शीशे में देख रहा है  और उसकी आँखों में सिर्फ आसु है
कामिनी - ( हँसते हुए ) आज तू औरत बनेगा>>>>> हा हा और मैं बनूँगी  मर्द   मैं सिखाउंगी की मर्द कैसे होते है  हा हा हां
कामिनी  मर्दो वाले लिवास पहनती है   और सोनू को खीचते हुए बेडरूम ले जाती है  और हमेशा की तरह बंगले में  सोनू की चीख और कामिनी की आह…….
कामिनी थक चुकी है अब वो अपने बारे में सोनू कुछ बता रही है
कामिनी - जानते हो सोनू मै अपने आप को  कामसूत्र की नायिका  समझती हु मुझे हमेशा लगता है  की मै पिछले जन्म में जरूर कोई कामुक अप्सरा  थी ... एक सुन्दर अप्सरा जो कभी  बूढी नहीं  हो सकती थी  ....  जब जब मै सेक्स के आनंद  में डूबती हु   ऐसा लगता है  ईश्वर मेरे सबसे करीब है   मुझे ऐसा लगता है मै सेक्स  से मोक्ष पा सकती हु  और  इसलिए मैंने एक तपस्या की  तुम्हे  पाने की   और ईश्वर  ने मुझे तुम्हे दिया  और आज तुम मेरे साथ हो   और एक दिन मै जरूर ईश्वर को पा लुंगी  बस तुम अपनी बच्चो जैसी हरकत  मत करना   मुझे बहुत दुःख होता है जब तुम  ऐसी  हरकत करते हो
और  इतना कहते  कहते  कामिनी  सो गई

                            
कामिनी को सोता देख,  सोनू  बंगले की चाभी  ढूढ़ने की कोशिस करता है    वो मोमबत्ती  जला  कर पुरे कमरे के कोने में   ढूंढ रहा है अचानक वो देखता है की कामिनी  ने मेक उप रूम  खुला छोड़  दिया है  वो मेक उप रूम में जाता है वह की हर अलमारी में तलाशता है  वहा उसे वो पुतला मिलता है जिससे कामनी बात किया करती थी   और उस पुतले के अंदर  उसे बंगले  की चाभी मिल जाती है  जब वो दरवाजे की और भागता है तो  सामने कामिनी खड़ी रहती है  वो कामिनी को जोर से धक्का देता है   और और उस पुतले को वही छोड़ कर भागता और  बंगले के किसी किनारे में छुप जाता है 
अब कामिनी  वो पुतले को अपने गोद में उठा कर सोनू को ढूंढने लगती है उस बंगले में सिर्फ एक आवाज  गूंज रही है सिर्फ कामिनी के चलने की आवाज
कामिनी-सोनु ...... सोनू ....... कहा छिपे हो  हूँ  देखो मुझे चोरे पुलिस का खेल  पसंद नहीं  है  बहार आ  जाओ  ये बचपना तुम छोड़ क्यों नहीं देते   सोनू....
कामिनी को दूसरे कमरे में आहट सुनाई देती  है वो  दूसरे कमरे की और दौड़ती है
कामिनी - मैंने १५ साल  की जवानी तुम्हारे इंतज़ार में बर्बाद की है और आज जब तुम मुझे  मिले हो  तो दूर भागना चाहते हो पर मैं ऐसा होने नहीं दूंगी
कामिनी और सोनू के बीच में एक लुका छुपी  का खेल शुरू हो जाता है
कामिनी - सोनू ये मत समझना  की मेरे इस बंगले में लाइट  नहीं जलती  है यदि मै चाहू  तो अभी  इस घर को  रोशन कर दू  इससे पहले मै कुछ करू तुम मेरे सामने आ जाओ  और हां   अपने दिमाग से निकल दो की तुम  इस घर से निकल पाओगे    मर्दो की तरह बहार आ जाओ मेरे प्रियतम ...
कामिनी  मेक उप रूम में लगा एक स्विच  ओन किया और पूरा घर महलो जैसा रोशन हो गया ... 
अब सोनू खुद बा खुद बहार आ गया  कामिनी   उसे देख कर  मुस्कुराई  
कामिनी - मुझे पता था तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे  तुम समझदार हो लेकिन छोटी छोटी सी गलतिया कर बैठते  हो चलो कोई बात नहीं
सोनू   उसे एक टक घूरने लगता है
कामिनी  - (हँसते हुए ) ओऊ   गुस्सा  ये तुम्हारे  गुस्से मिजाज ज्यादा अच्छा है  उस बच्चो जैसे मिज़ाज़ से 
सोनू -  कामिनी जी   आपको मोक्ष कभी नहीं  मिल पायेगा  और ऐसे ही  इस नरक  में इंतज़ार  और तड़पती रहोगी क्योकि  आप  कोई अप्सरा या देवी नहीं  एक डायन हो  डायन   ......... डायन   
सोनू तेज़ से धक्का देता है  कामिनी के हाथ से वो पुतला गिर जाता है   सोनू दौड़ के  पुतले के  अंदर से चाभी  निकलता है  और दरवाजे की और भागता है   कामिनी उसके पीछे दौड़ती है  सोनू दरवाजा खोले के बाहर आ जाता है  और सड़क में दौड़ने लगता है  कामनी उसके पीछे दौड़ रही है
कामिनी - मै तुम्हारे बिना नहीं जी पाऊँगी सोनू  मुझसे दूर मत जाओ प्ल्ज़्ज़
अचानक सोनू सामने से आते ट्रक से  टकरा  जाता है   और उसकी डेथ हो जाती है   ....... कामिनी  उसे मरा  देख  रुक जाती है  और चुपचाप   बंगले की और लौट जाती है  बंगले के दरवाजे फिर बंद हो जाते है   कामिनी तेज़  तेज़ से रो रही है  आज  सोनू की चीख नहीं सिर्फ कामनी की चीख गूंज रही थी iबंगले में 
          
सोनू की मौत के बाद  क्या कामनी की  इच्छा  खत्म हो गई  शायद नहीं  क्योकि आज  बहुत दिनों बाद कामिनी अपने बंगले से बहार निकली है   वो बच्चो के गार्डन  के झूले में बैठी है  वो फिर से एक बच्चे को घूर रही है  ..........कामिनी फिर से १५ साल का  इंतज़ार करने को तैयार है ...                                
                                                                                                                                                              
                                                                                                         
 

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