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तुम दुर्गा नही
काली नही
लक्ष्मी नही
तुम बस इंसान हो
देवी नही
तुम्हारा देवी होना
उस फूल जैसा है
जो किसी पत्थर के पैरों पर
चढ़ने के लिए डाल से तोड़ लिया जाता है
और उस गाय जैसा
जो चुनावी मौसम में
इरादतन महान बना दी जाती है
तुम्हारे लिए कभी नही
होता है तुम्हारा देवी होना
ये वो चमकीले दाने है
जिन्हें चुनने की सजा में कोई चिड़िया
ताउम्र जेल पाती है
परिवार की इज़्ज़त का मुकुट
सलीकेदार , शालीन होने की
तारीफे सब तुम्हारे पिंजरे के
के तार है।
अपने आप से तोड़कर
तुम भुला दिए जाओगे
उस फूल की तरह
तुम्हारा बेमकसद सड़ जाना
कोई नही देखेगा
तुम देवी मत बनना
तुम कुछ भी बन जाना
कोई कलंक
कोई दाग
कोई दुख कोई रोड़ा
कोई आग
कोई रंग
कोई गीत कोई धुन
या बस कोई सूखा पत्ता
जो हिम्मत करे हवा से भिड़ जाने की

Tum devi nahi

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L C Singh

Member, Film Writers Association, Mumbai Playwright and Author - feature film..
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RAJESH KUMAR

Yoon to safar zindagi ka Bahut lambda lagta hai. Kat jayenge Mauz me garr saath ho Tumbhi.

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